Picky Eaters से परेशान? बच्चों को हेल्दी खाना खिलाने के आसान और मजेदार तरीके 

Picky Eaters से परेशान? बच्चों को हेल्दी खाना खिलाने के आसान और मजेदार तरीके.

हर रोज़ खाने को लड़ाई? बच्चों के लिए सेहतमंद भोजन आसानी से परोसें, मज़ाकुछ ऐसे।

एक बच्चा हर बार सब्ज़ियाँ देखते ही मुंह फेर लेता है। कभी-कभी वो सिर्फ चिप्स या मीठे नाश्ते पर अड़ जाता है। ऐसे में माता-पिता कई बार चिंतित हो उठते हैं। इस तरह की आदतें आजकल लगभग हर घर में नजर आती हैं। कोई भी खाने के मामले में ज्यादा छोटा नहीं होता।

खाने से इनकार कर दे तो मम्मी-पापा के लिए मुश्किल शुरू हो जाती है। बढ़ने और सोचने के लिए बच्चों को सही भोजन चाहिए होता है।

बच्चे भोजन के समय अक्सर नखरे दिखाते हैं, ऐसा क्यों होता है पता नहीं। इस पोस्ट में इसी बारे में बात करेंगे। कुछ छोटे-छोटे तरीके हैं जिनसे वे सेहतमंद भोजन भी खा लेते हैं। मज़ा आए तो वे चखने को तैयार हो जाते हैं।

कभी सोचा है, पिकी ईटर्स वास्तव में क्या हैं?

कभी-कभी कुछ बच्चे सिर्फ एक ही तरह का खाना खाना पसंद करते हैं।

  • कुछ लोग अपने आहार में बदलाव पसंद नहीं करते।
  • कई बार तो मन केवल कुछ ही चीज़ों को खाने का करता है।
  • हरियाली से तुरंत मुड़ जाते हैं, कभी-कभी बच निकलने का रास्ता ढूंढते।

इन उम्र के बच्चों में यह बात अक्सर नज़र आती है।

बच्चे खाने में नखरे क्यों करते हैं?

1. स्वाद की आदत

मीठा या जंक खाने की आदत बचपन से ही पकड़ में लेती है।

2. नई चीज़ों का डर

हर बार जब कुछ नया होता है, तो बच्चे पीछे हट जाते हैं।

3. ध्यान आकर्षित करना

माँ-बाप का ध्यान खींचने के लिए कभी-कभी बच्चे भोजन छोड़ देते हैं।

4. भूख का पैटर्न

कभी-कभी किसी बच्चे को ज्यादा खाने का मन होता है, कई बार पेट भरने तक छोड़ता नहीं। फिर अगले दिन वही बच्चा सिर्फ एक कौर खाकर झट से मुंह बंद कर लेता है।

बच्चों को हेल्दी खाना खिलाने के आसान तरीके

1. मज़ा आएगा खाने में जब थोड़ी चटपटी चीज़ डाल दें।

  • अक्सर छोटे बच्चे ऐसी ही चीज़ों की तरफ झुकते हैं, जो नज़र आते ही ध्यान खींच लें।

कटे हुए फल कभी गोल होते हैं। सब्जियाँ कई बार पतली-पतली स्लाइस में आती हैं। कभी-कभी एक को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है। दूसरी ओर डंठल लंबे-लंबे टुकड़ों में कटते हैं।

  • रंगों से भरी प्लेट दिखे।
  • हँसते हुए चेहरे या फिर कार्टून स्टाइल में कुछ बनाएं।

खाने का स्वाद अगर बच्चों को पसंद आएगा, तभी वे खुश होकर उसे खाएंगे।

2. थोड़ी-थोड़ी बार भोजन परोसें।

  • भरी हुई थाली छोटे बच्चों के लिए घबराहट पैदा कर सकती है।
  • थोड़ी-थोड़ी बार खाना देना चाहिए।
  • बार-बार थोड़ा-थोड़ा खिलाएं
  • बच्चे पर कोई भारीपन महसूस नहीं होता।

3. किचन में बच्चे हों, तो काम सूखा नहीं।

  • खाना बनाने में हिस्सा लेने से बच्चों की प्लेट तक पहुँचने वाली हर चीज़ में उनका मन लगता है।
  • सलाद बनाने दें
  • फल धोने दें
  • प्लेट सजाने दें

आत्मविश्वास में सुधार हो जाता है।

4. थोड़ा समय बाद एक नई चीज़ आहार में जुड़ती है।

  • थोड़ा-थोड़ा करके अपनाओ, पूरी तबदीली एक साथ नहीं।
  • कभी-कभी पसंद के भोजन में कुछ अलग सा मिला दें।
  • उदाहरण के तौर पर, सब्ज़ियों को पराठे में डाल सकते हैं।
  • बच्चा कुछ समय में अपने आप हेल्थी भोजन पर ध्यान देने लगता है।

5. जबरदस्ती न करें

जब मना होता है, तभी बच्चा ज़्यादा नाटक करता है।

प्यार से समझाएं

अपने मन से फैसला करने दो।

हवा में खुशबूदार पल हों तो कमरे का माहौल ही बदल जाता है।

6. एक रूटीन बनाएं

हर दिन खाना कुछ बजे मिलना चाहिए।

  • हर सुबह, नाश्ते की चाय उबलती है। दोपहर में खाना घर से आता है। रात का भोजन धीमे आँच पर पकता है।
  • थोड़ी देर के बाद फिर स्नैक्स का सहारा लेने से बचें।

सही वक्त पर बच्चे को खाने की चाहत महसूस होने लगती है।

7. खाते समय स्क्रीन को पीछे छोड़ दें।

खाते समय अगर बच्चे के सामने मोबाइल या टीवी है, उसका ध्यान भोजन से भटक जाता है।

खाने का स्वाद उसे सही तरह नहीं मिलता, साथ ही मात्रा का भी ध्यान नहीं रहता।

8. अपने आप को ही मिसाल बना लेना।

सीखना उनकी आँखों के रास्ते मन में उतरता है।

जब तक मम्मी-पापा सब्जियां खाएंगे, बच्चे को भी वही टेस्ट आएगा।

9. बच्चों की पसंद का ध्यान रखें

कुछ बच्चे एक तरफ़ झुकाव महसूस करते हैं, किसी को कुछ और समय लगता है।

  • जब वो कुछ स्वादिष्ट चाहें, तो उसमें हल्का मसाला डालकर बना दें।
  • मान लो कि बच्चे को मीठा खाना अच्छा लगता है, ऐसे में उसकी थाली में फल ज़रूर आए।

10. धैर्य रखें

एक दिन में पिकी खाने की आदत गायब नहीं होती।

  • बार-बार कोशिश करें
  • समय बच्चे के साथ बिताएं।

थोड़े समय बाद वह पुराना तरीका भूलने लगेगा।

मस्ती से भरपूर कुछ स्‍वस्थ खाने के विचार।

  • वेजिटेबल पराठा
  • फ्रूट चाट
  • स्मूदी
  • पनीर रोल
  • ओट्स उपमा

इनका स्वाद अच्छा है, इसके बावजूद पोषण में कमी नहीं।

क्या बच्चों को जंक फूड बिल्कुल बंद कर देना चाहिए?

थामना ज़रूरी नहीं, पर इसे कमज़ोर करना चाहिए।

  • अक्सर इसे सिर्फ़ एक तोहफ़ा समझ कर दे दिया जाता है।
  • हर रोज़ कुछ ऐसा मत बनने दें।

सही पोषण के बिना बढ़ते शरीर को ताकत नहीं मिलती। छोटे दिमाग को समझने के लिए पौष्टिक भोजन चाहिए होता है। कई बार कमजोरी की वजह सिर्फ खाने में कमी होती है। ऊर्जा बनी रहे, इसके लिए हर घर में संतुलित आहार होना जरूरी है।?

संतुलित आहार से:

  • स्वस्थ बढ़ने में मदद मिलती है
  • शरीर की रक्षा प्रणाली सुदृढ़ हो जाती है।
  • सीखने में सुधार दिमाग के बढ़ने से आता है।
  • बस ऊर्जा कभी खत्म नहीं होती।

बच्चों की देखभाल में मददगार सुझाव

  • बच्चों पर दबाव न डालें
  • खाने को पॉजिटिव अनुभव बनाएं
  • हर बार जब वे आगे बढ़ें, तो उसपर ध्यान दें।
  • हर चीज़ को दूसरे के साथ मिलाकर न देखें।

निष्कर्ष

बच्चे अक्सर पिकी ईटर होते हैं, फिर भी सावधानी से खाना दें तो उन्हें संतुलित आहार मिल सकता है।

खाने का सिलसिला बच्चों के लिए हल्का-फुल्का रहे, इस पर ज़ोर डालने की बजाय। तनाव से भरी बातें छोड़कर खुशी आधारित माहौल ही सही रहता है।

याद रखें –

बचपन में जो खाने के तरीके सीखे जाते हैं, वे पूरी उम्र चलते रहते है ।

एकदम शांति से काम लेने पर बच्चा धीमे-धीमे सेहतमंद खाने की आदत बनाने लगता है। फिर उसका जीवन मजबूत भी होता है, साथ में खुश भी रहता है।

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