भूमिका
हिंदी भाषा को सबसे खास बनाती है इसकी सरलता और विशेष तौर पर एक भारतीय से इसका लगाव जो बच्चों को बड़ों से जोड़ता है। ऐसे में जब भी बच्चों को अपनी मातृभाषा हिंदी सिखाने की बात आती है तो उसका आरंभ स्वरों (अ, आ, इ, ई…) और व्यंजनों (क, ख, ग, घ…) से होता है। लेकिन इन अक्षरों को जोड़ना,अर्थपूर्ण शब्द बनाना सीखना आसान कैसे बनाएं यही जानते हैं।
इस सीढ़ी में, ‘अ’ और ‘आ’ की मात्रा वाले शब्द सबसे पहले आते हैं। ‘अ’ हिंदी का प्रथम स्वर है, जो बिना किसी चिह्न के हर व्यंजन में छिपा होता है और ‘आ’ (ा) उसका विस्तृत रूप है, जो उच्चारण में थोड़ा खिंचा हुआ लगता है।
आज के इस महत्वपूर्ण ब्लॉग में हम अ की मात्रा वाले शब्द और आ की मात्रा वाले शब्द को 2, 3 और 4 अक्षरों के ज़रिए समझते हैं। यह न सिर्फ बच्चों के लिए बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए भी फलदाई है जो हिंदी सीखने की जिज्ञासा रखते हैं।
पाठ 1: अ की मात्रा वाले शब्द – ‘अ’ का वास्तविक रूप
‘अ’ हिंदी भाषा का एकमात्र स्वर है जिसकी कोई लिखित मात्रा नहीं होती है। बोलते या पढ़ते वक्त जब किसी व्यंजन के साथ ‘अ’ का उच्चारण होता है और किसी भी अक्षर पर कोई दूसरी मात्रा नहीं लगती, तो वहाँ ‘अ’ की मात्रा स्वयं ही लग जाती है। उदाहरण के लिए: ‘य’ + ‘अ’ (मात्रा के बिना) = ‘य’ (यहाँ ‘अ’ छिपा है)
2 अक्षर वाले शब्द (अ की मात्रा)
छोटे बच्चों को सबसे पहले ऐसे अक्षर को जोड़ना और पढ़ना सिखाया जाता है जो सरल,आम बातचीत में उपयोग होने वाले होते हैं और याद करने में भी ज़्यादा आसान रहते हैं।जैसे:
डर (ड + र – ‘अ’ की मात्रा दोनों पर)
घर ( घ + र )
3 अक्षर वाले शब्द (अ की मात्रा)
अक्षरों में वृद्धि बच्चों को छोटे वाक्य पढ़ने में सक्षम बनाती है, कुछ ऐसे वाक्य जो बिना किसी मात्रा के दो,तीन,चार या इससे अधिक वाले अक्षरों से बने हुए शब्द सहित लिखित हो। जैसे:
फसल ( फ + स + ल )
कमल ( क + म + ल )
स्वर :इसमें दो तीन अक्षर मौजूद हैं,
स्वर = स् + व् + अ + र
4 अक्षर वाले शब्द (अ की मात्रा)
ये लंबे शब्द होते हैं पर फिर भी इसमें ‘अ’ के इलावा कोई और दूसरी मात्रा की भूमिका नहीं होगी मतलब ऐसे शब्दों के हर अक्षर में ‘अ’ की आवाज़ है। जैसे:
करतब (क + र + त + ब)
अजगर ( अ + ज + ग + र)
सरगुन– यह शुद्ध ‘अ’ के स्वर में नहीं है, ‘गुन’ में ‘उ’ की मात्रा
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पाठ 2: आ की मात्रा वाले शब्द – ‘आ’ (ा) का विवरण
‘आ’ की मात्रा किसी भी व्यंजन के पहले न लगा कर हर व्यंजन के बाद ही लगाई जाती है, (जैसे: ला,था ,गा)। यह ‘अ’ से लंबी ध्वनि मानी जाती है।
2 अक्षर वाले शब्द (आ की मात्रा)
इन शब्दों को समझना,लिखना तथा बोलना बहुत ही सहज हैं क्योंकि इनका इस्तेमाल रोज़मर्रा की बातचीत में देखने को मिल ही जाता है। जैसे:
आम ( आ + म )
खा + ना ( खा + ना)
3 अक्षर वाले शब्द (आ की मात्रा )
इस तरह के शब्दों में ‘आ’ मात्रा एक या दो बार आ जाती है। जैसे:
लगाव (ल + गा + व )
अकाल (अ + का + ल)
4 अक्षर वाले शब्द (आ की मात्रा)
तीन अक्षर के बाद बच्चों को चार अक्षरों वाले शब्द जो पहले से भी लंबे होते हैं अब पढ़ने और बोलने के लिए सीखने में इतना मुश्किल नहीं लगता है। जैसे:
कलाकर (क + ला + क + र)
शरमाना (श + र + मा + ना)
तरसाना ( त+ र+ सा+ ना )
कैसे सिखाएं बच्चों को आसानी से और सबसे कम समय में अच्छी हिंदी?
आपके पास अब हिंदी भाषा को सीखने के लिए मात्राओं की सूची तो आ ही गई है,अब बारी है यही सारा ज्ञान एक दम सटीक और मज़ेदार तरीके से अपने बच्चों को सिखाने की।आप निम्नलिखित कुछ गतिविधियों से अपने बच्चों का उत्साह बढ़ा सकते हैं:
1. तुकबंदी वाले शब्द : जब आप बच्चों को एक शब्द सिखाते हैं न तो उसे उसी शब्द से मिलते-जुलते शब्द बोलना और फिर वही शब्दों को बोल-बोल कर कॉपी में लिखना सिखाएं।
2. चित्रविद्या : आप बच्चे को किसी भी शब्द की पहचान उसके एक चित्र से करा सकते हैं,जैसे कि आप एक कमल या थरमस बना कर उसके चित्र के नीचे शब्द लिख कर बता सकते हैं कि इस चित्र को क्या कहते हैं। इससे शब्द से अर्थ समझने में आसानी होती है।
3.वाक्य बनवाना : जब बच्चा कुछ आसान शब्द सीख जाए और समझ जाए तो आप उसे छोटे-छोटे वाक्य बनवाना शुरू कर दें।जैसे:राम घर जाता है। (यहाँ ‘राम’ और ‘घर’ अ मात्रा, ‘जाता’ में आ मात्रा)
4. रिक्त स्थान अभ्यास : एक बार बच्चा वाक्य समझना तथा बोलते हुए लिखना सीख जाए,उसके बाद उसी के जैसे वाक्यों में कुछ शब्दों के अक्षरों या फिर अकेले शब्द में से अक्षर को हटा के बच्चे को खाली स्थान भरने के लिए दें, इससे वह शब्दों को बोलने,लिखने तथा समझने में सक्षम होगा। जैसे:
क _ ल( कमल )
शाम बर_द (बरगद) पर _ल (फल) लेने चढ़ा।
5. फ़्लैश कार्ड्स: रंग-बिरंगे कागज़ों से बने छोटे-छोटे कागज़ के पैकेट किसी भी स्टेशनरी पर आपको मिल जाएंगे या आप घर पर ही किसी रंगीले कागज़ के छोटे हिस्से करके भी ये फ़्लैश कार्ड्स आप झटपट बना सकते हैं, बस जो शब्द आप कॉपी पर लिखते हैं वही शब्द आप आकर्षक तरीके से इन्हीं कार्ड्स पर लिखें, बच्चे बहुत चाव से पढ़ाई करेंगे।
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निष्कर्ष
हिंदी को बिना ठीक से समझे,बच्चा न तो सही उच्चारण कर सकता है और न ही वाक्य बनाने में महारत हासिल कर सकता है। दो अक्षर वाले शब्दों से शुरू करते हुए, तीन और फिर चार अक्षरों के शब्दों की यह शिक्षा एक सीढ़ी की तरह है। दी गई सूची और तरीकों से अपने बच्चों को अभ्यास कराएँ।अगर बच्चा गलती करता है तो उसको हर बार एक नए उत्साह से दोबारा सिखाते हुए उसे प्रोत्साहन दें।
अगर आपको यह लिस्ट उपयोगी लगी हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ ज़रूर साझा करें। हिंदी को सरल और सहज बनाने के लिए बने रहें!
क्या आपके पास ऐसे शब्द हैं जो इस सूची में शामिल किए जा सकते हैं,अपने विचार हमें लिख कर ज़रुर बताएं।
